अधिक मास :- सौर वर्ष और चन्द्र वर्ष सामज्जस्य स्थापित करने के लिए हर तीसरे वर्ष में एक चन्द्रमास की वृद्धि हो जाती है उसे अधिक मास कहते है ।
पुरुषोत्तम मास :- हमारे शास्त्र के अनुसार पुरुषोत्तम मास का निर्णय कैसे करते हैं। 12 चंद्र मास के कारण 354 दोनो का एक चंद्र वर्ष होता है। सौर वर्ष 365 दिन का होता है। प्रतिवर्ष 11दिनों का अन्तर का पड़ता है। तीन वर्षो में यह संख्या 30 होने से पर एक अधिक मास बन जाता है। 4 जुलाई से 23 जुलाई 2023 तक पुरुषोत्तम मास रहेगा।इस काल में सभी शुभ मुहूर्त और कार्य वर्जित माना जाता है। संक्रान्ति हीन चांद्र मास होता है और जिस चांद्रमास में सूर्य की संक्रांति नहीं आती है, उस मास को अधिक मास कहा जाता है। मल मास में भगवान शिव शंकर की उपासना का विशेष महत्व बताया गया है। इस मास में कोई भी शुभ कार्य वर्जित माना जाता है।
हमारे शास्त्रों में सूर्य एक वर्ष में बारह राशियों में गोचर करते हैं और जिस सूर्य मेष राशि से मीन राशि तक चलेगा l जब सूर्य किसी राशि में प्रवेश करते हैं और संक्रांति कहते हैं और जो मास बिना संक्रांति रहित होता हैं अधिक मास कहते हैं l सौर वर्ष 365 दिन, 6 घण्टे और 11 सेकेण्ड का होता हैं और चन्द्र वर्ष 354 दिन लगभग 9 घण्टे का समय होता हैं l सौर वर्ष और चांद मास के मध्य में समाजस्य स्थापित करने के लिए भारतीय शास्त्रकारों द्वारा अधिक मास की व्यवस्था की गई हैं l हर तीसरे वर्ष में एक पुरषोत्तम मास की पुनरावृत्ति होना सम्भव हैं l अधिक मास और मल मास में मनुष्य को अपने पाप कर्मों को गंगा में प्रवाहित करने चाहिए l भगवान् श्री विष्णु जी ने अपने पुरषोत्तम देकर कहा है और मनुष्यों को अपने निंदनीय कृत्य और पाप कर्मों को गंगा में प्रवाहित करना चाहिए l प्रतिदिन स्नान, दान और जप तप करना चाहिए l
भगवान् श्री विष्णु जी आराधन करे और भक्ति और यथा शक्ति से पूजा अर्चना करनी चाहिए l
पुरुषोत्तम मास का आरम्भ 17 मई 2026 से रविवार से ज्येष्ठ मास होगा और 15 जून 2026 सोमवार तक चलेगा l पुरषोत्तम मास में सभी शुभ कार्यों को वर्जित माना गया हैं l जैसे विवाह, यज्ञ, देव प्रतिष्ठा, महादान, मुण्डन, चूड़ा कर्म, नए गाड़ी खरीदना, नव गृह प्रवेश, भूमि और संपत्ति नहीं खरीदनी चाहिए l

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