Sunday, July 26, 2026

🕉️ चातुर्मास 2026: मुख्य व्रत, त्यौहार और उत्सव (25 जुलाई से 20 नवंबर 2026)

      चातुर्मास ("चार महीने") सनातन परंपरा के सबसे पवित्र आध्यात्मिक समयों में से एक है। मानसून के दौरान, यह वह समय है जब भगवान विष्णु क्षीर सागर (दूध के महासागर) में योग निद्रा (दिव्य योग निद्रा) में चले जाते हैं। 

                                                                                                                                             

          🕉️ चातुर्मास 2026: मुख्य व्रत, त्यौहार और उत्सव (25 जुलाई से 20 नवंबर 2026)

          चतुर्मास का आरंभ शनिवार, 25 जुलाई 2026 को आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की हरिशयनी (देवशयनी) एकादशी से हो रहा है।  इस समय सूर्य देव कर्क राशि में हैं।  चतुर्मास के इन चार महीनों के दौरान, भगवान विष्णु योगनिद्रा (योग निद्रा) में रहते हैं, और इसलिए, इस अवधि के दौरान विवाह और गृह प्रवेश समारोह जैसे सभी शुभ और मांगलिक कार्य निषिद्ध होते हैं।

             आइए जानें चातुर्मास 2026 के अंतर्गत आने वाले सभी प्रमुख त्योहारों और तिथियों के बारे में:

           🔴 जुलाई 2026

              25 जुलाई (शनिवार): देवशयनी (हरिशयनी) एकादशी - चातुर्मास प्रारंभ।

              29 जुलाई (बुधवार): गुरु पूर्णिमा, श्री शिव शयनोत्सव और पवित्र श्रावण (सावन) महीने की शुरुआत।

              🔴अगस्त 2026

              9 अगस्त (रविवार): कामिका एकादशी व्रत और गुरु (बृहस्पति) का पूर्व उदय।

             15 अगस्त (शनिवार): हरियाली तीज और स्वतंत्रता दिवस।

             17 अगस्त (सोमवार): श्री कल्कि जयंती और नाग पंचमी।

             23 अगस्त (रविवार): पुत्रदा (पवित्रा) एकादशी व्रत।

            28 अगस्त (शुक्रवार): रक्षाबंधन और श्रावण पूर्णिमा।

            ​29 अगस्त (शनिवार): भाद्रपद (भादों) कृष्ण पक्ष की शुरुआत।

            ​31 अगस्त (सोमवार): बहुला चतुर्थी/गणेश चतुर्थी (कृष्ण पक्ष)।

                  ​🔴सितंबर 2026

             ​4 सितंबर (शुक्रवार): श्री कृष्ण जन्माष्टमी व्रत।

             ​5 सितंबर (शनिवार): गोगा नवमी.

             ​7 सितंबर (सोमवार): अजा एकादशी व्रत।

            ​14 सितंबर (सोमवार): कलंक चतुर्थी और सिद्धिविनायक श्री गणेश चतुर्थी व्रत।

            ​18 सितंबर (शुक्रवार): महालक्ष्मी व्रत आरंभ।

            ​19 सितंबर (शनिवार): श्री राधा अष्टमी जयंती.

  ​          22 सितंबर (मंगलवार): पद्मा (परिवर्तिनी) एकादशी व्रत।

            ​23 सितंबर (बुधवार): श्री वामन जयंती।

           ​26 सितंबर (शनिवार): श्री सत्यनारायण व्रत और भाद्रपद पूर्णिमा।

           27 सितंबर (रविवार): पितृ पक्ष (श्राद्ध पक्ष) शुरू।

                   🔴अक्टूबर 2026

           3 अक्टूबर (शनिवार): महालक्ष्मी व्रत समाप्त।

          6 अक्टूबर (मंगलवार): इंदिरा एकादशी व्रत (पितृ पक्ष एकादशी)।

          10 अक्टूबर (शनिवार): सर्व पितृ अमावस्या (श्राद्ध पक्ष समाप्त)।

         11 अक्टूबर (रविवार): आश्विन शारदीय नवरात्रि प्रारंभ (घटस्थापना)।

         18 अक्टूबर (रविवार): श्री दुर्गा महा अष्टमी।

        20 अक्टूबर (मंगलवार): महानवमी और विजयादशमी (दशहरा त्योहार)।

        27 अक्टूबर (मंगलवार): कार्तिक माह कृष्ण पक्ष आरंभ और शुक्र उदय।

        29 अक्टूबर (गुरुवार): करवा चौथ व्रत।

                         🔴नवंबर 2026

                   1 नवंबर (रविवार): अहोई अष्टमी व्रत।

                    4 नवंबर (बुधवार): रमा एकादशी व्रत।

                   6 नवंबर (शुक्रवार): धनतेरस (धन त्रयोदशी)।

                 7 नवंबर (शनिवार): श्री हनुमान जयंती (कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी)।

                 8 नवंबर (रविवार): रूप चौदस/नरक चतुर्दशी।

               9 नवंबर (सोमवार): दिवाली (कार्तिक अमावस्या)।

              10 नवंबर (मंगलवार): गोवर्धन पूजा और अन्नकूट।

              11 नवंबर (बुधवार): भाई दूज (यम द्वितीया)।

              15 नवंबर (रविवार): छठ पूजा व्रत।

          20 नवंबर (शुक्रवार): देवउठनी (प्रबोधिनी) एकादशी - भगवान विष्णु योगनिद्रा से जागेंगे, जो चातुर्मास के अंत का             🕉️प्रतीक होगा, और सभी शुभ और मांगलिक गतिविधियां फिर से शुरू होंगी।

🌸




​    🙏🕉️चातुर्मास चार चंद्र महीनों में  केंद्र बदलता है, हर महीना खास देवताओं और आध्यात्मिक विषय को समर्पित करना चाहिए :

​         1. सावन / श्रावण (30 जुलाई – 28 अगस्त)

​           मुख्य फोकस: भगवान शिव।

           सावन सोमवार (सोमवार) को व्रत, जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और बेलपत्र चढ़ाना।

             🕉️2. भाद्रपद (29 अगस्त – 26 सितंबर)

​             भगवान कृष्ण और भगवान गणेश की आराधना करें l

            मुख्य:- कृष्ण जन्माष्टमी और गणेश चतुर्थी।

​          अभ्यास: जप, श्रीमद् भागवत पढ़ना और भक्ति वाले व्रत रखना।

              3. अश्विन (27 सितंबर – 26 अक्टूबर)

​              मुख्य फोकस: पूर्वज और देवी दुर्गा।

            मुख्य कार्यक्रम: पितृ पक्ष (पहला भाग) जिसके बाद शारदीय नवरात्रि आती है।

           अभ्यास: वंश के सम्मान के लिए तर्पण की रस्में, जिसके बाद दुर्गा सप्तशती का पाठ।

           4. कार्तिक (27 अक्टूबर – 20/21 नवंबर)

​           मुख्य फोकस: भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी।

         मुख्य कार्यक्रम: दिवाली, गोवर्धन पूजा और तुलसी विवाह।

         अभ्यास: सुबह-सुबह पवित्र स्नान, दीपदान और तुलसी पूजा।

              क्या रोकें बनाम क्या करें

​      क्योंकि दक्षिणायन और विष्णु के सोने के दौरान दिव्य ऊर्जा अंदर की ओर मुड़ जाती है, इसलिए भौतिक विस्तार रुक        जाता है जबकि आध्यात्मिक अभ्यास बढ़ता है।

          🚫 मांगलिक कार्य

             शादी और सगाई

         गृह प्रवेश और ज़मीन खरीदने की रस्में

        मुंडन और उपनयन संस्कार

         बड़े नए कमर्शियल काम शुरू करना

         🕉️ बताए गए व्रत और नियम और साधना

         मंत्र जप: "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" का जाप करना या विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना।

           सात्विक डाइट: भारी, बहुत ज़्यादा मसालेदार या गैर-सात्विक खाने से बचें। पारंपरिक रूप से, हर महीने कुछ खास खाने की चीज़ों से परहेज़ किया जाता है (सावन में हरी पत्तेदार सब्ज़ियाँ, भाद्रपद में दही, आश्विन में दूध, कार्तिक में दालें)।

         दान: इस समय ज़रूरतमंदों को खाना, कपड़े, साफ़ पानी और दवा दान करने से कर्मों का फल कई गुना बढ़ जाता है।

         सत्संग और स्वाध्याय: आध्यात्मिक प्रवचन सुनना, धर्मग्रंथ पढ़ना और शांति से खुद के बारे में सोचना।




​चातुर्मास चार चंद्र महीनों में  केंद्र बदलता है, हर महीना खास देवताओं और आध्यात्मिक विषय को समर्पित करना चाहिए :

​1. सावन / श्रावण (30 जुलाई – 28 अगस्त)

​मुख्य फोकस: भगवान शिव।

सावन सोमवार (सोमवार) को व्रत, जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और बेलपत्र चढ़ाना।

2. भाद्रपद (29 अगस्त – 26 सितंबर)

​ भगवान कृष्ण और भगवान गणेश की आराधना करें l

मुख्य:- कृष्ण जन्माष्टमी और गणेश चतुर्थी।

​अभ्यास: जप, श्रीमद् भागवत पढ़ना और भक्ति वाले व्रत रखना।

3. अश्विन (27 सितंबर – 26 अक्टूबर)

​मुख्य फोकस: पूर्वज और देवी दुर्गा।

मुख्य कार्यक्रम: पितृ पक्ष (पहला भाग) जिसके बाद शारदीय नवरात्रि आती है।

अभ्यास: वंश के सम्मान के लिए तर्पण की रस्में, जिसके बाद दुर्गा सप्तशती का पाठ।

4. कार्तिक (27 अक्टूबर – 20/21 नवंबर)

​मुख्य फोकस: भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी।

मुख्य कार्यक्रम: दिवाली, गोवर्धन पूजा और तुलसी विवाह।

अभ्यास: सुबह-सुबह पवित्र स्नान, दीपदान और तुलसी पूजा।

क्या रोकें बनाम क्या करें

​क्योंकि दक्षिणायन और विष्णु के सोने के दौरान दिव्य ऊर्जा अंदर की ओर मुड़ जाती है, इसलिए भौतिक विस्तार रुक जाता है जबकि आध्यात्मिक अभ्यास बढ़ता है।

🚫 मांगलिक कार्य

शादी और सगाई

गृह प्रवेश और ज़मीन खरीदने की रस्में

मुंडन और उपनयन संस्कार

बड़े नए कमर्शियल काम शुरू करना

🕉️ बताए गए व्रत और नियम और साधना

मंत्र जप: "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" का जाप करना या विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना।

सात्विक डाइट: भारी, बहुत ज़्यादा मसालेदार या गैर-सात्विक खाने से बचें। पारंपरिक रूप से, हर महीने कुछ खास खाने की चीज़ों से परहेज़ किया जाता है (सावन में हरी पत्तेदार सब्ज़ियाँ, भाद्रपद में दही, आश्विन में दूध, कार्तिक में दालें)।

दान: इस समय ज़रूरतमंदों को खाना, कपड़े, साफ़ पानी और दवा दान करने से कर्मों का फल कई गुना बढ़ जाता है।

सत्संग और स्वाध्याय: आध्यात्मिक प्रवचन सुनना, धर्मग्रंथ पढ़ना और शांति से खुद के बारे में सोचना।

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