🙏🩸कुंडली में केतु दोष के लिए समाधान 🩸🙏
ज्योतिषीय महत्व: यह ग्रह वैवाहिक जीवन में परेशानियां बढ़ाता है और खुशियां कम करता है। इसका संबंध त्वचा, पुत्रों, ननिहाल पक्ष, पालतू कुत्तों और सभी तरह के वायरस से है। छठे या बारहवें भाव में होने पर केतु को मजबूत माना जाता है, जबकि वृषभ राशि में होने पर यह कमजोर होता है। केतु पर मंगल और शनि का प्रभाव होने से पेशाब संबंधी विकार, मानसिक तनाव, ऐसी बीमारियां जिनका पता न चल पाए, आत्महत्या के विचार, महामारी, पैरों में जलन, जोड़ों का दर्द, पीठ के निचले हिस्से में दर्द, कान की समस्याएं, हर्निया, कुष्ठ रोग, ट्यूमर, नाभि का खिसकना, पैरों में दर्द और डर जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
रविवार के दिन काले कुत्ते को रोटी खिलाएं। गणेश जी के मंदिर जाएं।
ससुराल से मिले हुए, बिस्तर पर ही सोएं।
दोनों पैरों के अंगूठों में चांदी की अंगूठी पहनें।
गले में सोने की चेन पहनें और केसर का तिलक लगाएं।
घर के मुख्य द्वार पर तांबे की प्लेट लगाएं।
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