. 🙏🙏 🕉️ श्री कृष्ण जन्मोत्सव ॥🕉️🙏🙏
भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि की वह घनघोर अंधेरी रात कोई साधारण रात्रि नहीं थी। वह समय था जब संसार को अधर्म के अंधकार से निकालकर धर्म के प्रकाश की ओर ले जाने के लिए स्वयं परमब्रह्म ने पृथ्वी पर अवतार लिया था। मध्यरात्रि ठीक 12 बजे, रोहिणी नक्षत्र के शुभ संयोग में जन्मे भगवान श्री कृष्ण की यह पावन गाथा आज भी हर भक्त के हृदय को अपार आनंद से भर देती है।
श्री कृष्ण जन्मोत्सव ॥
"यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत। अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्॥"
१. कंस का अत्याचार और कारागार का प्राकट्य
द्वापर युग में जब अत्याचारी कंस के पापों से धरती कांपने लगी, तब वसुदेव और देवकी जी के आठवें पुत्र के रूप में भगवान विष्णु का आगमन हुआ। कंस ने अपनी मृत्यु के भय से बहन देवकी और वसुदेव जी को मथुरा के निर्जन कारावास में लोहे की भारी बेड़ियों से जकड़कर बंदी बना रखा था। परंतु जब स्वयं सृष्टि के रचयिता का आगमन हुआ, तो योगमाया के प्रभाव से कारागार के सभी पहरेदार गहरी निद्रा में लीन हो गए, बेड़ियां स्वतः टूट गईं और भारी द्वार खुल गए।
२. उफनती यमुना और शेषनाग का छत्र
वसुदेव जी नवजात बाल-कृष्ण को एक सूप (टोकरी) में रखकर मूसलाधार वर्षा के बीच गोकुल की ओर निकल पड़े। मार्ग में गरजते बादल और घनघोर बारिश थी, लेकिन भगवान की रक्षा के लिए स्वयं शेषनाग ने अपने फणों की छत्रछाया बना ली। जब वसुदेव जी यमुना नदी में प्रवेश करने लगे, तो उफनती कालिंदी अपने प्रभु के चरण स्पर्श करने के लिए आतुर हो उठीं। जैसे ही बाल-कृष्ण के चरणों ने जल को छुआ, यमुना शांत हो गईं और वसुदेव जी को सुरक्षित गोकुल तक पहुँचने का मार्ग दे दिया।भगवान के जन्म लेते ही उनकी योगमाया से कारागार के सभी पहरेदार और अधिकारी गहरी निद्रा में सो गए। कारागार के द्वार स्वतः खुल गए और वसुदेव जी की बेड़ियां टूट गईं। प्रभु की लीला के अनुसार वसुदेव जी नवजात बालक कृष्ण को सूप में रखकर गोकुल में नंद बाबा और माता यशोदा के पास सुरक्षित पहुंचाने के लिए निकल पड़े।
यमुना जी का उफान और चरण स्पर्श
३. गोकुल का आनंद और कंस वध
नंद बाबा और माता यशोदा के घर कृष्ण का आगमन होते ही पूरा गोकुल 'नंद घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की' के जयकारों से गूंज उठा। यशोदा माँ के आँगन में पले-बढ़े कन्हैया ने बाल्यकाल से ही अपनी दिव्य लीलाओं से सबका मन मोह लिया। आगे चलकर मात्र आठ वर्ष की अल्पायु में प्रभु ने अत्याचारी कंस का वध करके अपने माता-पिता को कारावास से मुक्त कराया और संसार को यह संदेश दिया कि अधर्म कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो, धर्म की विजय निश्चित है।
४. व्रत और पूजन का महत्व
शास्त्रों के अनुसार जन्माष्टमी के दिन व्रत रखने और मध्यरात्रि में बाल-गोपाल का माखन, मिश्री, पंचामृत तथा तुलसी दल से पूजन-अभिषेक करने से जीवन के सभी पापों का नाश होता है। यह पावन पर्व हमें सिखाता है कि कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी धर्म और सत्य का मार्ग कभी नहीं छोड़ना चाहिए।
निद्रा का प्रभाव और यमुना पार गमन
भगवान के जन्म लेते ही उनकी योगमाया से कारागार के सभी पहरेदार और अधिकारी गहरी निद्रा में सो गए। कारागार के द्वार स्वतः खुल गए और वसुदेव जी की बेड़ियां टूट गईं। प्रभु की लीला के अनुसार वसुदेव जी नवजात बालक कृष्ण को सूप में रखकर गोकुल में नंद बाबा और माता यशोदा के पास सुरक्षित पहुंचाने के लिए निकल पड़े।
यमुना जी का उफान और चरण स्पर्श
रात्रि में मूसलाधार वर्षा हो रही थी। जब वसुदेव जी यमुना नदी (टिप्पणी: लोककथाओं में कालिंदी/यमुना जी का उल्लेख मिलता है) में प्रवेश करने लगे, तो भगवान के दर्शन और स्पर्श की अभिलाषा में नदी का जल उफान मारने लगा। जैसे ही बाल-कृष्ण ने अपने चरण बाहर निकालकर यमुना जल को स्पर्श किया, यमुना जी शांत हो गईं और वसुदेव जी को पार जाने का मार्ग दे दिया। शेषनाग ने स्वयं अपने फणों से प्रभु को वर्षा से बचाया।
कंस वध और महाभारत में भूमिका
वसुदेव जी ने श्री कृष्ण को गोकुल में नंद-यशोदा के पास छोड़ दिया और वहां जन्मी योगमाया को लाकर कारागार में स्थापित कर दिया। गोकुल में पलकर बड़े हुए श्री कृष्ण ने मात्र आठ वर्ष की आयु में अपने अत्याचारी मामा कंस का वध कर दिया और माता-पिता को कारावास से मुक्त कराया। आगे चलकर उन्होंने अनेकों लीलाएं कीं तथा धर्म की स्थापना के लिए महाभारत के युद्ध में मुख्य सूत्रधार और अर्जुन के सारथी बनकर संसार को 'श्रीमद्भगवद्गीता' का अमर संदेश दिया।
भक्तिमय कैप्शन: "भाद्रपद की इस पावन रात, हुआ धर्म का नया प्रभात। कंस के कारागार में जन्में, जन-जन के मन-मोहन नाथ॥" #जय_श्री_कृष्ण #जन्माष्टमी
"भाद्रपद की इस पावन रात, हुआ धर्म का नया प्रभात। कंस के कारागार में जन्में, जन-जन के मन-मोहन नाथ॥" #जय_श्री_कृष्ण #जन्माष्टमी
गीता संदेश आधारित कैप्शन: "जब-जब धर्म की हानि होती है, प्रभु अलौकिक रूप में अवतरित होते हैं। आइए, इस जन्माष्टमी अपने भीतर के अहंकार का वध कर भक्ति का दीप जलाएं।" #ShriKrishna #Janmashtami
"जब-जब धर्म की हानि होती है, प्रभु अलौकिक रूप में अवतरित होते हैं। आइए, इस जन्माष्टमी अपने भीतर के अहंकार का वध कर भक्ति का दीप जलाएं।" #ShriKrishna #Janmashtami
जन्मोत्सव पर:
"नंद घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की। हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की॥"
यमुना पार करते समय:
"गरज उठे काले बादल, चमकी भीषण बिजली भारी। सूप में प्यारे लल्ला को ले, चले वसुदेव बनवारी॥"

No comments:
Post a Comment