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Sunday, October 30, 2022

घर के निर्माण में आय का विचार करना

 

                                             


           घर के निर्माण में आय का विचार करना चाहिए। गृह स्वामी के हस्तादि लम्बाई और चोड़ाई को परस्पर गुणा कर,उसको आठ से भाग दे देखना चाहिए और भाग करने के बाद जो शेष बचता हैं।वह क्रम से ध्वजादि आय होते है।1 ध्वज 2 धूम्र 3 सिंह 4 शवान 5 वृषभ 6 गर्दभ 7 हसित  8 शून्य   

 इनमे एक ,तीन, पाँच और सात विषम संख्या की आय  शुभ होती हैं।सम सख्या को अशुभ माना जाता है। घर के लिए जो भूमि खरीद कर रहे हैं उस भूमि को अन्दर की ओर से मापना चाहिए। 32 हाथ चौड़े घर में आय आदि विचार की आवश्यकता नहीं पड़ती है।नही चार दरवाजो वाले घर में ही।

 ब्राह्मण जाति के लिए ध्वजाय, 

क्षत्रियों के लिए सिंहाय  

वैश्य समाज के लिए गजाय और

 शूद्र वर्ग के लिए वृषभाय विशेष शुभ होती हैं। 

अन्य आय जाति के लिए शुभ होती हैं।ग्रह का निर्माण करते समय राशि और दिशा का विचार करना चाहिए। 1. मेष राशि - उत्तर दिशा 



         

नाम  जन्म नक्षत्र के अनुसार

 

 

वर्णमाला

 

  नाम

 

 

अश्विनी

 

चू, चे, चो, ला

 

मेष राशि

 

भरणी

 

ली, लू, ले ,लो

 

मेष राशि

 

कृतिका

 

अ, इ, उ, ए 

 

वृषभ राशि

 

रोहिणी

 

ओ, वा, वी, वु

 

वृषभ राशि

 

मृगशिरा

 

वे, वो, का, की

 

मिथुन राशि

 

आर्द्रा

 

कू, घ, ड, छ

 

मिथुन राशि

 

पुनर्वसु

 

के को, ह, हि

 

कर्क राशि

 

पुष्य

 

 हु, हे, हो,डा

 

 कर्क राशि


आश्लेषा

 

डी, डु, डे, डो

 

 कर्क राशि

 

माघ

 

 

माँ, मी, मु, मे

 

 सिंह राशि

पूर्वा फाल्गुनी

 

मो, ता, टी, तू,

 

 सिंह राशि

उत्तरा फाल्गुनी

 

टे, टा, पा, पी

 

कन्या राशि

 

हस्त

 

पू, ष, ण, उ

 

 कन्या राशि

चित्रा

पे, पो, रा, री

 

तुला राशि

स्वाति

 

रु, रे, रो, ता स

 तुला राशि

विशाख

 

टी, तू, ते, तो

 

वृश्चिक राशि

 

अनुराधा

 

ना, नी, नु, नी

 

  वृश्चिक राशि                                 

ज्येष्ठ

 

न हीं, हां, यी, यू

 

   वृश्चिक राशि                      

  मूला

ये ,या, यी, यू

धनु राशि 


     पूर्वाषाढ़ा

 

भू, ध,फ़,ढ़

           

 धनु राशि           

उत्तराषाढ़

भे, भो, जा,जी

 

 मकर राशि         

अभिजीत  


जू, जे, जो, खा

     मकर राशि       

श्रवण

खी, खू, खे, खो ई

 

मकर राशि

धनिष्ठा

  ग, गी, गू, गे

कुंभ राशि

 

शतभिषा

गो,सा, सी, सू 

कुंभ राशि

पूर्वाभाद्रपद

से, सो, दा, दी

मीन राशि

उत्तराभाद्रपद

रेवती

दू, थ,झ,अं

दे, दो, चा, ची 

 

मीन राशि

मीन राशि

                                                                                                                               

                    उस समय जब घर बनाने का विचार किया जाता है। ज्योतिष के अनुसार आपकी राशि और शहर की राशि के बीच मेल होना चाहिए। जैसे रमेश चंद्र जैसा कोई जो दिल्ली में घर बनाना चाहता है। रमेश की तुला राशि और देहली की मीन राशि बनती है। तुला 7 परिवर्तनशील राशियाँ, विषम मीन द्विस्वभाव 12 राशियाँ बनती हैं जो मेल नहीं खातीं। इसका मतलब स्थिरता नहीं है। वास्तु शास्त्र के अनुसार 2/9/5/11/10 शुभ कार्य को दर्शाता है। यदि नगर की राशि और राशि का नाम 1/3/4/6/7/8/12 हो तो जातक पर अशुभ प्रभाव पड़ता है। वे हानि, रोग, हानि, शत्रुता और एक के बाद एक रोग हैं।

 

 

 

 

 

 

                                   

 

शतभिषा

 

जाओ, सा, देखो, सू

पूर्वभाद्रपद

मीन राशि

से, सो, दा, दी

उत्तरा भाद्रपद

 

दू, थ, झा, अनू

रेवती

 

Monday, December 15, 2014

सौर मण्डल

सौर मण्डल : -
         सौर मण्डल वह मंडल जिसमे हमारे सभी ग्रह सूर्य के एक निश्चित मार्ग पर पश्चिम से पूर्व दिशा की ओर सूर्य के गिर्द परिक्रमा करते रहते है ज्योतिस शास्त्र के अनुसार सौर परिवार बुध, शुक्र, पृथ्वी,चन्द्र ,मगंल, बृहस्पति ,शनियूरेनस, नेप्चून,प्लूटो |

                                      


       
             बुध सबसे छोटा ग्रह और सूर्य के सबसे ज्यादा नजदीक है । सभी ग्रह स्वंय प्रकशित नही होते व सूर्य से प्रकाश लेकर अपनी कक्षा में सूर्य के गिर्द च्रक लगाते है । सूर्य से हमे प्रकाश,शक्ति, गर्मी,और जीवन मिलता है इस प्रकाश को पृथ्वी पर पहुँचने में साढ़े आठ मिनट लगभग है ।
         पृथ्वी को  सूर्य के गिर्द घूमते लगभग सवा 365 दिन लगते है तब एक चक्कर पूरा होता है । बुध को 88 दिन में चककर लगाता है । शुक्र 225 दिनों में, मंगल 687 दिनों में, बृहस्पति लगभग पौने बारह वर्षो में, शनि साढ़े 29 वर्षो में, यूरेनस 84 वर्षो में, नेपचून 165 वर्षो में, प्लूटो 248 वर्षो एवं 5 मासो में सूर्य के गिर्द परिक्रमा पूरा करता है । सभी ग्रह अपने पथ पर क्रान्तिवृत से 7-8 दक्षिणोत्तर होकर सूर्य की परिक्रमा कर रहे है|
        उपग्रह हमेशा अपने ग्रहो के गिर्द घूमते है । पृथ्वी हमेशा सूर्य के गिर्द घूमती है । इस लिए आकाश गतिशील स्थिति में रहता है । यह गति लगभग 30 किलोमीटर प्रति सेकेन्ड है ।